तनवीर
हरिद्वार, 28 फरवरी। शनिवार को किन्नर समाज ने खड़खड़ी श्मशान घाट पर मसान होली खेली। भवानी शंकरानंद गिरी के नेतृत्व में बैंड-बाजों के साथ जुलूस के रूप में खड़खड़ी शमशान घाट पहुंचे किन्नरों ने सबसे पहले चिता की राख की विधिवत पूजा-अर्चना की। इसके बाद एक दूसरे को चिता की राख और रंग गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएं दीं। शमशान घाट पर जलती चिताओं के समीप किन्नरों को होली खेलते देख कुछ देर के लिए लोग स्तब्ध रह गए। भवानी शंकरानंद गिरी ने सभी को होली की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सतयुग में श्मशान होली मनायी जाती थी।
उन्होेंने बताया कि भगवान शिव रंगभरी एकादशी पर देवी गौरा का गौना कराकर उनके साथ काशी पहंुचे थे। भगवान शिव भूत-प्रेत, यक्ष, गंधर्व और प्रेत आदि के साथ होली नहीं खेल पाए थे। इसलिए उन्होंने सभी के साथ अगले दिन मसान में होली खेली। इसके बाद से मसान की होली की पंरपरा शुरू हुई। काशी में मनाए जाने वाली मसान होली की पंरपरा को किन्नर समाज ने हरिद्वार में भी शुरू किया है। तीन वर्ष से किन्नर समाज हरिद्वार में मसान होली मना रहा है। उन्होंने सभी से केमिकल फ्री होली मनाने और सनातन से जुड़ने का आह्वान भी किया।
पूनम किन्नर ने कहा कि श्मशान मोक्ष का द्वार है और हर व्यक्ति को एक दिन यहां आना है। किन्नर समाज मसान की होली मनाने की पौराणिक परंपरा को जीवंत कर रहा है। प्रेम पुरी ने कहा कि राष्ट्रहित की कामना के साथ किन्नर समाज ने मसान होली खेली है। उन्होंने कहा कि श्मशान की राख जीवन की नश्वरता का संदेश देती है और अहंकार त्याग कर प्रेम व भाईचारे के साथ जीवन जीने की प्रेरणा देती है। इस दौरान बड़ी संख्या में किन्नर शामिल रहे।


