जेंडर-फ्री सुपर ह्यूमन बच्चों की प्रस्तुतियाँ बनीं विशेष आकर्षण
दयालबाग में लोहड़ी का पावन पर्व अत्यंत श्रद्धा, उत्साह एवं सांस्कृतिक उल्लास के साथ मनाया गया। सुबह से ही “डन ट्यूबवेल, विद्युत नगर” स्थित खेतों में सतसंगी भाई-बहन एवं बच्चे नियत समय पर प्लांटेशन मेंटेनेंस कार्य हेतु एकत्र होने लगे और इसी के साथ लोहड़ी उत्सव का शुभारंभ हुआ।
इस अवसर पर 3 सप्ताह से 12 वर्ष तक की आयु के जेंडर-फ्री सुपर ह्यूमन बच्चों की रंग-बिरंगी भेष-भूषा एवं परिधान सभी के आकर्षण का केंद्र बने। ये सभी बच्चे परम पूज्य हुज़ूर प्रो. प्रेम सरन सतसंगी साहब के साथ लोहड़ी का पर्व मनाने को लेकर अत्यंत उत्साहित एवं आनंदित दिखाई दिए।
जब परम पूज्य गुरुमहाराज एवं परम आदरणीय रानी साहिबा खेतों में पधारे, तब नियमित कृषि गतिविधियों के साथ-साथ लोहड़ी से जुड़े विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। जेंडर-फ्री सुपर ह्यूमन बच्चों द्वारा प्रस्तुत भावपूर्ण एवं मनमोहक प्रस्तुतियों ने समस्त उपस्थितजनों को भावविभोर कर दिया।
इस भव्य आयोजन में देश-विदेश से लाखों सतसंगियों ने ऑनलाइन एवं ऑफलाइन माध्यमों से सहभागिता की, जिससे उत्सव की गरिमा और व्यापकता और भी बढ़ गई।
उत्सव का उल्लास उस समय चरम पर पहुँच गया जब प्रातः 8 बजे तथा पुनः दोपहर में विद्युत नगर पर परम पूज्य गुरुमहाराज एवं परम आदरणीय रानी साहिबा जी की गरिमामयी उपस्थिति में कार्यक्रम के द्वितीय एवं तृतीय चरण का शुभारंभ हुआ।
द्वितीय चरण में डी.ई.आई. (DEI) के विद्यार्थियों द्वारा लोहड़ी के उपलक्ष्य में विशेष सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दी गईं, जिन्होंने पूरे वातावरण को जीवंत बना दिया।
तृतीय चरण में भी लोहड़ी के उल्लास से सराबोर कार्यक्रमों की प्रस्तुतियाँ निरंतर चलती रहीं।
लोहड़ी महोत्सव का यह रंगारंग आयोजन देश-विदेश के लगभग 580 केंद्रों पर सजीव प्रसारण के माध्यम से देखा गया। इस अवसर की विशेष बात यह रही कि देश-विदेश की सभी प्रमुख शाखाओं एवं केंद्रों ने वीडियो माध्यम से अपनी-अपनी सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ साझा कीं, जिससे वैश्विक सत्संग समुदाय की समरस एवं व्यापक भागीदारी सुनिश्चित हुई।
कार्यक्रम के उपरांत परम पूज्य हुज़ूर ने ई.वी. (EV) से पावन कोठी की ओर प्रस्थान की मौज फ़रमाई। वापसी के मार्ग में उन्होंने समस्त भक्तजनों को अपनी आलौकिक एवं दिव्य दृष्टि से भावविभोर करते हुए आशीर्वाद प्रदान किया।
दयालबाग में आयोजित यह भव्य लोहड़ी महोत्सव संपूर्ण सत्संग जगत को आनंद, उमंग एवं सांस्कृतिक समरसता के रंग में सराबोर कर गया।


