तनवीर
हरिद्वार, 11 फरवरी। सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कालेज की वाणिज्य की प्रवक्ता नेहा जोशी ने कहा है कि कॉमर्स के छात्र के पास सबसे अधिक विकल्प हैं। लेकिन विडंबना यह है कि कॉमर्स का छात्र ही सबसे अधिक भ्रम में है। सीए, सीएस, सीएमए, बी.कॉम, एम.कॉम, एमबीए, बैंकिंग, स्टार्टअप आदि विकल्पों की इस भीड़ में छात्र अक्सर यह तय ही नहीं कर पाता है कि उसे जाना कहां है। कॉमर्स केवल अकाउंट्स की किताब नहीं है, यह निर्णय लेने की क्षमता विकसित करने का विषय है। लेकिन दुर्भाग्य यह है कि कई छात्र कॉमर्स इसलिए चुनते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि इसमें साइंस जैसी मेहनत नहीं करनी पड़ेगी। यही सोच आगे चलकर सबसे बड़ी रुकावट बन जाती है।
आज की सबसे बड़ी समस्या यह नहीं है कि कॉमर्स में अवसर कम हैं, समस्या यह है कि दिशा समय पर तय नहीं की जाती। नेहा जोशी ने कहा कि कक्षा 11 में प्रवेश लेते समय ही छात्र को यह समझना चाहिए कि क्या वह प्रोफेशनल कोर्स की ओर जाएगा, क्या वह मैनेजमेंट में रुचि रखता है, या वह आगे रिसर्च और शिक्षण के क्षेत्र में जाना चाहता है। बिना लक्ष्य के पढ़ाई करना, ऐसा ही है जैसे बिना नक्शे के यात्रा करना। जिसमें मेहनत बहुत होती है, लेकिन मंज़िल अनिश्चित रहती है। आज कई कॉमर्स छात्र केवल परीक्षा पास करने तक सीमित रह गए हैं
वे यह नहीं समझ पाते कि अंक सिर्फ परिणाम नहीं, बल्कि भविष्य की दिशा तय करने वाला आधार भी होते हैं। अच्छे अंक अवसरों के दरवाज़े खोलते हैं। इसे नज़रअंदाज़ करना खुद के साथ अन्याय है। माता-पिता और शिक्षकों की भूमिका यहां अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। केवल यह कह देना कि जो अच्छा लगे वो कर लो पर्याप्त नहीं है। बच्चों को विकल्पों की जानकारी, उनकी क्षमता के अनुसार मार्गदर्शन और सही समय पर सच्ची सलाह देना ज़रूरी है।
नेहा जोशी ने कहा कि कॉमर्स का छात्र कमजोर नहीं होता, लेकिन वह अक्सर अस्पष्ट सोच का शिकार हो जाता है। यदि सही समय पर सही दिशा मिल जाए, तो कॉमर्स का छात्र न केवल सफल प्रोफेशनल बन सकता है, बल्कि नीति निर्धारण, प्रबंधन और राष्ट्र की आर्थिक रीढ़ भी बन सकता है। अब समय आ गया है कि कॉमर्स को सेकेंड चॉइस नहीं, स्ट्रटेजिक चॉइस के रूप में देखा जाए। दिशा स्पष्ट होगी, तो मेहनत सही जगह लगेगी और परिणाम अपने आप आएंगे।


