मृतक केतन के परिवार से मिलने टिहरी जा रहे सांसद चंद्रशेखर रावण और विधायक उमेश कुमार को पुलिस ने रोका

Haridwar News
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पुलिस कार्रवाई के विरोध में शंकराचार्य चौक पर धरने पर बैठे दोनों नेता
हरिद्वार, 28 जून। टिहरी गढ़वाल के चर्चित केतन हत्याकांड के पीड़ित परिवार से मिलने जा रहे नगीना सांसद चंद्रशेखर रावण और खानपुर विधायक उमेश कुमार को पुलिस ने शंकराचार्य चौक पर रोक दिया। इस दौरान दोनों नेताओं और पुलिस अधिकारियों के बीच जमकर नोकझोंक और धक्का मुक्की हुई। धक्का मुक्की के बीच सांसद चंद्रशेखर रावण के कपड़े फट गए। विरोध जताते हुए दोनों नेता सड़क पर ही धरने पर बैठ गए। जानकारी के मुताबिक रविवार को दोनों नेताओं के समर्थकों के साथ टिहरी कूच करने की सूचना पर सवेरे से ही शंकराचार्य चौक पर स्थानीय पुलिस के साथ बड़ी संख्या में पैरामिलिट्री फोर्स के जवान तैनात किए गए थे।

जैसे ही सांसद चंद्रशेखर रावण और विधायक उमेश कुमार का काफिला शंकराचार्य चौक पहुंचा, पुलिस ने उसे आगे बढ़ने से रोक दिया। इसके बाद दोनों नेता गाड़ियों से उतरकर पैदल आगे बढ़ने लगे। उनके साथ समर्थक भी मौजूद थे। लेकिन पुलिस बल ने उन्हें चौक पर ही रोक लिया। इस दौरान पुलिस और नेताओं के बीच आगे जाने को लेकर तीखी बहस शुरू हो गई, जो कुछ ही देर में धक्का मुक्की तक पहुंच गई।

अफरा तफरी के बीच सांसद चंद्रशेखर रावण के कपड़े भी फट गए। मौके पर मौजूद एसपी सिटी अभय सिंह और सीओ सिटी शिशुपाल सिंह नेगी ने दोनों नेताओं को काफी देर तक समझाने का प्रयास किया और आगे नहीं बढ़ने की अपील की।
इस दौरान चंद्रशेखर रावण ने आरोप लगाया कि पुलिस कर्मियों ने उनके साथ अभद्रता और गाली गलौज की। सरकार के दबाव में उन्हें पीड़ित परिवार से मिलने से रोका जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि टिहरी में केतन की हत्या बर्बरतापूर्ण की गई। उसके बावजूद भी पीड़ित परिवार डर के साए में है। पीड़ित परिवार के आग्रह पर ही वो उनसे मिलने जा रहे थे। लेकिन पुलिस उन्हें आगे जाने नहीं दे रही है। उन्होंने साफ तौर से कहा कि वो पीड़ित परिवार से मिलकर रहेंगे, चाहे उसके लिए कोई कितना भी जोर लगा ले। विधायक उमेश कुमार ने कहा कि केतन हत्याकांड के बाद पीड़ित परिवार को खतरा है। सरकार और प्रशासन को उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी लेनी पड़ेगी। जब तक पीड़ित परिवार को न्याय नहीं मिलेगा, तब तक प्रयास जारी रहेगा। धरने के सवाल पर उन्होंने कहा कि जब तक वरिष्ठ अधिकारी मौके पर आकर पीड़ित परिवार की सुरक्षा की जिम्मेदारी सुनिश्चित नहीं करते, तब तक वो धरने पर बैठे रहेंगे। पुलिस के समझाने पर दोनों नेता नहीं माने और पुलिस कार्रवाई का विरोध करते हुए शंकराचार्य चौक पर ही धरने पर बैठ गए। जिससे चौक पर कुछ समय के लिए यातायात भी प्रभावित रहा और जाम के कारण लोगों को दिक्कत उठानी पड़ी।

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