देहरादून/ लखनऊ, :-हरिद्वार सांसद एवं उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से लखनऊ में वैज्ञानिकों के साथ पशुधन से प्राप्त गोबर के नवोन्मेषी एवं वैज्ञानिक उपयोग से संबंधित विषय पर भेंट एवं चर्चा की।
बैठक में गोबर आधारित वैज्ञानिक नवाचारों के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने, किसानों की आय बढ़ाने, स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित करने, पर्यावरण संरक्षण, प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने तथा सतत विकास के विभिन्न आयामों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।
श्री रावत ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत आज अपनी पारंपरिक ज्ञान परंपरा को आधुनिक विज्ञान और नवाचार से जोड़ते हुए आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिख रहा है। “विकसित भारत–2047” और “आत्मनिर्भर भारत” के संकल्प को साकार करने में गो-आधारित जैव-अर्थव्यवस्था एक महत्वपूर्ण आधार बन सकती है।
उन्होंने कहा कि यदि गोबर आधारित उत्पादों, जैव-ऊर्जा, जैविक उर्वरक, निर्माण सामग्री एवं अन्य वैज्ञानिक उत्पादों का बड़े स्तर पर उत्पादन और विपणन किया जाए तो इससे गांवों में स्वरोजगार के नए अवसर विकसित होंगे, किसानों की आय में वृद्धि होगी तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।
श्री रावत ने कहा कि यह मॉडल आवारा गौवंश की समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में भी अत्यंत प्रभावी सिद्ध हो सकता है। जब गोबर और गौ-आधारित उत्पादों का आर्थिक मूल्य बढ़ेगा, तब गौसंरक्षण जनभागीदारी का विषय बनेगा और गौवंश बोझ नहीं, बल्कि ग्रामीण समृद्धि का आधार बनेगा। इससे गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ गोपालन को भी नई आर्थिक शक्ति मिलेगी।
उन्होंने कहा कि गो-आधारित जैव-अर्थव्यवस्था गांव, गरीब और किसान को सशक्त बनाने के साथ भारत को पर्यावरण संरक्षण एवं सतत विकास के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व प्रदान करने की दिशा में एक प्रभावी मॉडल सिद्ध होगी। प्रधानमंत्री जी के विकसित भारत के विजन और मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी के सुशासन एवं गौसंरक्षण के प्रयासों का यह समन्वय ग्रामीण भारत के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोलेगा।


