पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक किया जाएगा-नितिन कौशिक

Haridwar News
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कमल खडका


वनाधिकार आंदोलन के संयोजक मनोनीत किए गए
हरिद्वार, 9 जून। वनाधिकार आन्दोलन चला रहे पूर्व कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने जनपद में वनाधिकार आन्दोलन के विधानसभा संयोजक नियुक्त किए हैं। जिसमें नितिन कौशिक भेल-रानीपुर, धर्मराज चौहान लकसर, चौधरी पद्मसिंह गुर्जर खानपुर, रविन्द्र कुमार मंगलौर, नरेश कुमार हरिद्वार ग्रामीण, हुकुम सिंह सैनी भगवानपुर संयोजक नियुक्त किए गए हैं।

उपाध्याय ने कहा कि धीरे-धीरे सभी राजनैतिक दल वनाधिकार आन्दोलन के एजेण्डे की ओर आ रहे हैं। अभी तक जल, जंगल और जमीन की बात होती थी। पहली बार “जन” की बात हो रही है। वन मन्त्री ने भी सकल पर्यावरण उत्पाद की बात की है, जिसके लिये वनाधिकार आन्दोलन पिछले 4 वर्षों से आन्दोलनरत है और उत्तराखंडियों को वनों पर उनके पुश्तैनी हक-हकूकों व अधिकारों को लेने की लड़ाई लड़ रहा है, उनकी क्षतिपूर्ति देने के लिये आन्दोलनरत है।

वनाधिकार आन्दोलन की माँग है कि क्षतिपूर्ति के रूप में राज्य के निवासियों को बिजली, पानी व रसोई गैस निःशुल्क दी जाय। परिवार के एक सदस्य को योग्यतानुसार सरकारी नौकरी दी जाय। केंद्र सरकार की सेवाओं में आरक्षण दिया जाय, जंगली जानवरों से जन हानि पर 25 लाख रूपए मुवावजा और प्रभावित परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाय। जड़ी-बूटियों के दोहन पर स्थानीय समुदाय का अधिकार हो तथा जल सम्पदा व नदियों पर लोकाधिकार हो। उपाध्याय ने कहा कि राज्य का लगभग 72 फीसदी भू-भाग वनों के लिये समर्पित कर दिया गया है, लेकिन स्थानीय समुदायों को उसका कोई लाभ नहीं मिल रहा है,

अपितु उन्हें प्रताड़ना मिलती है। उन्होंने कहा कि यह बिलकुल सही और उपयुक्त समय है जब वन तथा वन्य पशु से सम्बन्धित कानूनों की समीक्षा जरूरी हो गयी है, ये नियम-कानून स्थानीय समुदायों पर कुठाराघात करते हैं। संयोजक नितिन कौशिक ने कहा कि उत्तराखण्ड प्रदेश वन सम्पदा से परिपूर्ण है। पर्यावरण संरक्षण व संवर्द्धन को लेकर हमे प्रयास करने होंगे। जंगलों के अंधाधुंध कटान पर रोक लगायी जाए। राज्य में पर्यटन की अनेकों संभावनाएं हैं। वनाधिकार आंदोलन चलाए जाने की आवश्यकता है। लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया जाएगा। साथ ही जनपद भर में कर्मठ कार्यकर्ताओं को संगठन से जोड़ने के प्रयास भी किए जाएंगे। समय समय पर शासन प्रशासन को चेताने का काम भी किया जाएगा। राज्यवासियों के हक हकुक की लड़ाई लड़ने का काम किया जाएगा।

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