मांगों को लेकर भोजन माताओं ने दिया डीएम कार्यालय पर धरना

Haridwar News
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तनवीर


हरिद्वार, 2 फरवरी। भोजनमाताओं की राज्यव्यापी हड़ताल में हरिद्वार जिले के 6 ब्लॉकों की भोजनमताएं भी शामिल हुई ओर विकास भवन रोशनाबाद पर एकत्रित होकर डीएम कार्यालय के सामने धरना दिया और मुख्यमंत्री को ज्ञापन प्रेषित किया। धरने को संबोधित करते हुए यूनियन की कोषाध्यक्ष नीता ने कहा कि उत्तराखंड की हजारों मिड-डे-मील वर्कर (भोजनमाता) वर्षों से अल्प मानदेय, अतिरिक्त काम के बोझ, मानसिक व शारीरिक उत्पीड़न और प्रशासनिक उपेक्षा को झेल रही है। सरकार द्वारा घोषित 5 हजार का मानदेय आज तक लागू नहीं किया गया है।

स्कूलों में भोजनमाताओं से उनके कार्यक्षेत्र से बाहर स्कूल के कमरों व मैदान की सफाई, चौकीदारी, माली और अन्य चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के कार्य कराए जा रहे हैं। भेल मजदूर ट्रेड यूनियन के महामंत्री अवधेश ने कहा कि कई विद्यालयों में गैस चूल्हा, पानी व मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। स्कूल खुलने से लेकर बंद होने तक भोजनमाताओं को स्कूलों में रोका जाता है और विरोध करने पर काम से हटाने की धमकी व अभद्र टिप्पणियां की जाती हैं। भोजनमाताओं को कोई छुट्टी नहीं दी जाती है। कुछ मामलों में भोजनमाताओं के साथ अपमानजनक व्यवहार भी सामने आया है।

क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन के नासिर अहमद ने कहा कि अभी हाल ही में उत्तराखंड सरकार ने उत्तराखंड राज्य में समान नागरिक संहिता लागू की है। एक तरफ सरकार कहती है कि एक देश, एक राज्य में दो कानून नहीं चलेंगे। मगर वहीं दूसरी ओर सरकार न्यूनतम वेतनमान में इतना भारी फर्क कर रही है। बढ़ती महंगाई के बीच मजदूर मेहनतकश जनता का अस्तित्व खतरे में है। इंकलाबी मजदूर केंद्र के हरिद्वार प्रभारी पंकज ने कहा कि एक ओर 25 हजार भोजनमाताओं की हालत बुरी है।

दूसरी ओर सांसद, विधायकों के वेतन भत्ते बढ़ते जा रहे है। सरकार बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ और महिला सशक्तिकरण जैसे विज्ञापनों पर करोड़ों रुपए खर्च कर रही है। लेकिन कर्मचारियों की मांगों को अनसुना कर रही है। यूनियन की कार्यकारिणी सदस्य ललिता ने कहा कि यदि सरकार ने समय रहते भोजनमाताओं की जायज मांगों का समाधान नहीं किया गया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। इस दौरान ललिता, पूनम, मीनाक्षी, सीमा, नीता सहित सैकड़ों भोजन माताएं व जयप्रकाश, अवधेश, महीपाल, कृष्ण मुरारी, एडवोकेट रुप चंद आजाद आदि शामिल रहे।
भोजन माताओं की प्रमुख मांगे
1.सरकार द्वारा घोषित 5 हजार रुपए मानदेय तत्काल लागू किया जाए।
2.भोजनमाताओं से अतिरिक्त काम करवाना बंद किया जाए।
3.न्यूनतम वेतन 18000 किया जाए।
4.स्कूलों में रसोई, गैस, पानी व सुरक्षा की समुचित व्यवस्था की जाए।

  1. उत्पीड़न, शोषण व अभद्र व्यवहार पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित जाए।
  2. भोजनमाताओं को सम्मान, सुरक्षा और स्थायित्व प्रदान किया जाए।
    फोटो नं.9-ज्ञापन देती भोजन माताएं