हलाला प्रकरण की पीड़िता के परिवार से मिले मदरसा शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष मुफ्ती शमून कासमी

Haridwar News
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पीड़ित परिवार को दिया सहयोग का आश्वासन
हरिद्वार, 19 मई। उत्तराखण्ड मदरसा शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष मुफ़्ती शमून क़ासमी ने ग्राम बंदरजूड का दौरा किया और हलाला प्रकरण की पीड़िता के परिवार से मुलाकात की। उत्तराखण्ड मदरसा शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष मुफ़्ती शमून क़ासमी ने सोमवार को ग्राम बंदरजूड पहुंचकर उत्तराखण्ड में समान नागरिक संहिता के अंतर्गत दर्ज हलाला के प्रथम प्रकरण से संबंधित पीड़िता के परिवारजनों से भेंट कर उनका हालचाल जाना तथा उन्हें न्यायिक प्रक्रिया में पूर्ण सहयोग एवं संवैधानिक अधिकारों के प्रति आश्वस्त किया।

इस अवसर पर मुफ़्ती शमून क़ासमी ने कहा कि उत्तराखण्ड में लागू समान नागरिक संहिता महिलाओं की गरिमा, समानता और न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। उन्होंने उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सराहना करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री धामी ने साहसिक नेतृत्व का परिचय देते हुए समाज में व्याप्त कुप्रथाओं के विरुद्ध प्रभावी कदम उठाया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि समान नागरिक संहिता इस्लाम विरोधी नहीं है।

इस्लाम महिलाओं को सम्मान, सुरक्षा, न्याय और गरिमा प्रदान करने की शिक्षा देता है। हलाला तथा तत्काल तीन तलाक जैसी कुप्रथाएँ महिलाओं के सम्मान और अधिकारों के प्रतिकूल हैं। मुख्यमंत्री धामी ने महिलाओं की सुरक्षा और सामाजिक समानता के लिए जो कदम उठाया है, वह सराहनीय एवं ऐतिहासिक है। मुफ़्ती शमून क़ासमी ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी राष्ट्रहित, सामाजिक समरसता और संवैधानिक आदर्शों को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री धामी का नेतृत्व युवा, ऊर्जावान, पारदर्शी और जनकल्याणकारी नेतृत्व का प्रतीक है तथा उनके नेतृत्व में उत्तराखण्ड विकास, सुशासन और सामाजिक न्याय के नए आयाम स्थापित कर रहा है।

मुफ़्ती शमून क़ासमी ने कहा कि उत्तराखण्ड सरकार द्वारा लागू की गई समान नागरिक संहिता संविधान की भावना के अनुरूप है और इसका उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार एवं समान न्याय सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि समाज को धर्म के नाम पर चल रही कुप्रथाओं और शोषणकारी प्रथाओं के विरुद्ध एकजुट होकर कार्य करना चाहिए। क़ासमी ने कहा कि मुख्यमंत्री धामी ने केवल एक कानून लागू नहीं किया, बल्कि समाज में व्याप्त अन्याय, भेदभाव और कुप्रथाओं के विरुद्ध एक व्यापक सामाजिक जागरण का कार्य किया है

इस दौरान स्थानीय ग्रामीणों एवं सामाजिक प्रतिनिधियों ने भी मुफ्ती शमून कासमी का स्वागत किया तथा क्षेत्रीय सामाजिक एवं शैक्षिक मुद्दों पर चर्चा की। मुफ़्ती शमून क़ासमी ने ग्रामीणों से सामाजिक सद्भाव, शिक्षा और महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड सामाजिक सुधार, महिला सम्मान और संवैधानिक मूल्यों की दिशा में एक नए युग की शुरुआत कर रहा है तथा राज्य सरकार के प्रयास देश के लिए प्रेरणास्रोत बन सकते हैं।

राज्यमंत्री शमून कासमी ने अंतरराष्ट्रीय शायर अफ़ज़ल मंगलोरी को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री द्वारा सम्मानित किए जाने पर उनके रुड़की आवास पहुंचकर बधाई दी और उनका अभिनन्दन किया। इस अवसर पर उत्तराखंड नागरिक सम्मान समिति के सचिव सलमान फरीदी, इमरान देशभक्त, सयैद नफिसुल हसन, बिटन त्यागी आदि मौजूद रहे।

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