तनवीर
भारतीय जागरूकता समिति ने स्कूली बच्चों को दी कानून की जानकारी
हरिद्वार, 30 नवम्बर। भारतीय जागरूकता समिति द्वारा शिवडेल स्कूल जगजीतपुर में विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, पुलिस, एआरटीओ के अधिकारियों, अधिवक्ताओं, समिति के पदाधिकारियों ने विभिन्न विषयों पर छात्र-छात्राओं को कानूनी जानकारी दी।
भारतीय जागरूकता समिति के अध्यक्ष हाईकोर्ट के अधिवक्ता ललित मिगलानी ने जानकारी देते हुए बताया कि नशा आज के दौर का बड़ा ही संजीदा विषय है। आजकल नशे का प्रभाव हर व्यक्ति के जीवन पर पड़ रहा है। परिवार के एक व्यक्ति के नशे का आदी होने से पूरा परिवार बर्बाद हो जाता है। नशा न केवल शारीरिक रूप से व्यक्ति को बर्बाद करता है, बल्कि आर्थिक रूप से पूरा परिवार प्रभावित होता है। इसलिए हर व्यक्ति को नशे से दूर रहना चाहिए और दूसरों को भी नशे से बचने के लिए प्रेरित करना चाहिए।
टीटीओ रविन्द्र सैनी ने छात्रों को सड़क सुरक्षा से संबंधित जानकारी देते हुए यातायात नियमों का पालन करने के लिए प्रेरित किया और लाइसेंस बनाने की प्रक्रिया भी बच्चों के साथ साझा की।
सीपीयू इंस्पेक्टर पवन नौटियाल ने बताया कि किस प्रकार से मौज मस्ती अपराध में परिवर्तित हो जाती है। उन्होंने कहा कि मौज मस्ती में तेज गति से वाहन चलाने पर कई कानूनों का उल्लंघन होता है जैसे ओवर स्पीड, रेड लाइट जंप, तेज गति से वाहन दौड़ाने पर किसी को टक्कर लगती है और वह घायल हो जाता है तो बीएनएस के तहत कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए हमेशा नियमों का पालन करें।
कनखल थानाध्यक्ष मनोहर रावत ने बताया कि नशे से दूर रहें। वाहन चलाते समय नियमों का पालन करें। कानून का उल्लंघन करने से बचें। हमेशा ध्यान रखें कि मौजमस्ती अपराध में ना बदल जाए। अधिवक्ता अरविंद श्रीवास्तव ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के बारे में जानकारी दी और बताया कि किस प्रकार एक आम व्यक्ति निःशुल्क विधिक सहायता प्राप्त कर सकता है। उन्होंने बताया कि यदि कोई आर्थिक अभाव के चलते अधिवक्ता की सेवा लेने में सक्षम नहीं है तो वह जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से अपने केस की पैरवी के लिए निःशुल्क वकील ले सकता है।
स्कूल के प्रधानाचार्य अरविंद बंसल ने भारतीय जागरूकता समिति का धन्यवाद किया और कहा कि शिविर के आयोजन से बच्चों को काफी उपयोगी कानूनी जानकारी मिलती है। इस प्रकार के आयोजन समय पर स्कूलों में होने चाहिए ताकि बच्चे कानून के प्रति जागरूक हो सके।


