ब्यूरो
हरिद्वार, 12 अप्रैल। श्री दरिद्र भंजन महादेव मंदिर कनखल में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन भागवताचार्य पंडित पवन कृष्ण शास्त्री ने श्रद्धालुओं को कथा श्रवण कराते हुए बताया कि प्रत्येक व्यक्ति को गौ सेवा करनी चाहिए। भगवान श्रीकृष्ण भी गौसवक थे। जब तक भगवान श्रीकृष्ण वृंदावन में रहे तब तक उन्होंने चरण पादुका धारण नहीं की। एक बार मैया यशोदा ने कृष्ण से कहा कि तुम नंगे पैर गौ चारण के लिए वन में जाते हो। तुम्हारे पैरों में कंकड़ पत्थर कांटे चुभ जायेंगे। इसलिए तुम चरण पादुका पहन लो। इस पर कृष्ण ने मैया यशोदा से कहा कि गौ माता भी नंगे पैरों चलती है।
यदि आप गौ माता को चरण पादुका पहना सको तो मैं भी चरण पादुका पहन लूंगा। मैया यशोदा और नंद बाबा के पास नौ लाख गाय थी। इसलिए ना तो मैया यशोदा नौ लाख गौ माता को चरण पादुका पहना पाई और ना ही कन्हैया ने चरण पादुका धारण की। शास्त्री ने कहा कि गौ माता के भीतर तेतीश कोटि देवी देवताओं का वास माना जाता है। गौमाता की सेवा करने से समस्त देवी देवताओं की आराधना और सेवा का पुण्य प्राप्त होता है।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि स्वामी कार्तिक गिरी महाराज, श्री अखंड परशुराम अखाड़ के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंडित अधीर कौशिक, कुलदीप शर्मा, ऋषि शर्मा, सरिता गुप्ता, अजय गुप्ता, कोमल गुप्ता, विजय गुप्ता, कामनी गुप्ता, कुसुम गुप्ता, दिनेश गुप्ता, सुनीता गुप्ता, सीमा गुप्ता, सोमेश गुप्ता, विकास गुप्ता, रुचि गुप्ता, रिंकू गुप्ता, डीके गुप्ता, रितेश गुप्ता, नीरज शर्मा, विमल गुप्ता, सुनीता गुप्ता, सुनील गुप्ता, सत्यम, शिवाय, चिराग, कार्तिक, आरवी, माधव, अनिया, पंडित कृष्ण कुमार शास्त्री, पंडित रमेशचंद्र गोनियल, पंडित राजेंद्र पोखरियाल, पंडित नीरज कोठारी, पंडित उमाशंकर पांडे आदि मौजूद रहे।


