हरिद्वार, 3 नवम्बर। उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले के यमकेश्वर ब्लॉक अंतर्गत मालागांव में 4 से 6 नवम्बर तक तीन दिवसीय हर्बल कुंभ जड़ी-बूटी कृषि मेला एवं धन्वंतरि महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। हर्बल वर्ल्ड हिमालय (श्री धन्वंतरि धाम) में आयोजित इस महोत्सव का उद्देश्य किसानों को आधुनिक एवं उन्नत कृषि तकनीकों से जोड़ना, प्राकृतिक और जैविक खेती को प्रोत्साहित करना तथा हिमालयी फसलों और औषधीय पौधों की मूल्य शृंखला को मजबूत कर किसानों के लिए बाजार एवं रोजगार के नए अवसर विकसित करना है।
खास बात यह होगी कि हिमालय से लेकर अफ्रीका और यूनान से चीन तक की विविध वनस्पतियों एवं पारंपरिक चिकित्सास विरासत को एक स्थान पर देखने का मौका मिलेगा। पतंजलि विश्वविद्यालय के कुलाधिपति स्वामी रामदेव और कुलपति आचार्य बालकृष्ण के मार्गदर्शन में आयोजित इस महोत्सव में कृषि वैज्ञानिकों, विशेषज्ञों, किसानों, उद्यमियों, स्वयं सहायता समूहों और विभिन्न संस्थाओं की भागीदारी रहेगी। चार नवंबर को उद्घाटन समारोह में उत्तराखंड सरकार के कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक और धन सिंह रावत शामिल होंगे। दूसरे दिन कैबिनेट मंत्री भगत सिंह चौधरी तथा समापन दिवस पर कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा मुख्य अतिथि के रूप में महोत्सव को संबोधित करेंगे।
तीन दिवसीय आयोजन में कृषि एवं जड़ी-बूटी प्रदर्शनी के साथ विशेष प्रशिक्षण सत्र आयोजित होंगे। इनमें मिट्टी की जांच एवं मॉडल खेती, मधुमक्खी पालन, व्यापक कीट विश्लेषण तकनीक, प्राकृतिक एवं जैविक खेती, डिजिटल कृषि, कृषि उत्पादों की प्रोसेसिंग एवं मार्केटिंग तथा उद्यमिता एवं उद्योग संबंधी प्रशिक्षण प्रमुख हैं। इसके अलावा गौशाला के स्वावलंबी मॉडल, कोकोपीट एवं कॉयर उद्योग और उच्च मूल्य वाली फसलों के प्रदर्शन की भी व्यवस्था रहेगी। मेले में पतंजलि किसान डायरी का विमोचन, कृषि मशीनरी एवं उत्पादों की प्रदर्शनी, जल संरक्षण मॉडल, पारंपरिक उत्पादों और व्यंजनों के स्टॉल, किसान मंच, एफपीओ एवं स्वयं सहायता समूहों की भागीदारी और क्रेता-विक्रेता सम्मेलन भी प्रमुख आकर्षण होंगे।
किसानों और वैज्ञानिकों के बीच संवाद, सेमिनार एवं कार्यशालाओं के माध्यम से ज्ञान और अनुभवों का आदान-प्रदान किया जाएगा। 4 नवंबर को उद्घाटन समारोह के साथ कृषि एवं हर्बल प्रदर्शनी का शुभारंभ होगा। स्वामी रामदेव और आचार्य बालकृष्ण के आशीर्वचन तथा अतिथियों के संबोधन के बाद प्रशिक्षण सत्र आयोजित होंगे। शाम को पतंजलि विश्वविद्यालय और माला भजन मंडली की ओर से सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। 5 नवंबर को उन्नत प्रशिक्षण, कृषि प्रसंस्करण और बाजार एकीकरण पर विशेष सत्र होंगे। किसानों को कृषि तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। शाम को स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं और माला भजन मंडली की ओर से सांस्कृतिक प्रस्तुतियां होंगी। 6 नवंबर को धन्वंतरि महोत्सव एवं समापन समारोह आयोजित होगा। इस दिन भी कृषि एवं हर्बल प्रदर्शनी तथा प्रशिक्षण सत्र चलेंगे। दोपहर एक बजे समापन सत्र में पुरस्कार वितरण के साथ मेले का समापन होगा।
पतंजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण ने बताया कि लगभग 200 एकड़ में फैला हर्बल वर्ल्ड हिमालय पारंपरिक चिकित्सा ज्ञान, औषधीय वनस्पति विरासत और प्राकृतिक संपदा के संरक्षण एवं संवर्धन को समर्पित परिसर है। यहां हिमालय से लेकर अफ्रीका और यूनान से चीन तक की विविध वनस्पतियों एवं पारंपरिक चिकित्सा विरासत को एक स्थान पर संजोने का प्रयास किया गया है। हर्बल कुंभ इसी विरासत को कृषि, विज्ञान, अनुसंधान और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़ने का मंच बनेगा।




