अमित वालिया
हरिद्वार, 30 जून। भूपतवाला स्थित अखण्ड दयाधाम में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के विश्राम पर संत समागम का आयोजन किया गया। संत समागम को संबोधित करते अखण्ड दयाधाम के परमाध्यक्ष महामंडलेश्वर स्वामी भास्करानंद महाराज ने कहा कि श्रीमद् भावगत अविरल बहने वाली ज्ञान की गंगा है। जिस प्रकार गंगा स्नान से पुण्य लाभ प्राप्त होता है। उसी प्रकार श्रीमद् भागवत कथा की भक्ति धारा में स्नान करने और कथा श्रवण से मिले ज्ञान को आत्मसात करने से जीवन सहज और सरल हो जाता है।
कांगड़ा पीठाधीश्वर शंकराचार्य शारदानंद सरस्वती महाराज, जगद्गुरु विजय देवाचार्य ने कहा कि भक्त और भगवान की कथा श्रीमद् भागवत जीवन जीने की कला सिखाती है। कथा के प्रभाव से अनंत पुण्यों की प्राप्ति होती है। महामंडलेश्वर चित् प्रकाशानंद एवं महामंडलेश्वर आदित्यानंद ने कहा कि पिछले जन्मों के पुण्यों का उदय होने पर ही श्रीमद् भागवत कथा के श्रवण और आयोजन का अवसर मिलती है।
महंत कमलेशानंद सरस्वती एवं महंत दुर्गादास ने कहा कि अन्य युगों में पुण्य प्राप्ति के लिए अनेक यत्न करने पड़ते थे। लेकिन कलियुग में श्रीमद् भागवत कथा के श्रवण से पुण्य प्राप्ति सहज ही हो जाती है। साध्वी कृष्णानंद, कथा के मुख्य यजमान विजय गोयल, प्रेम गोयल, श्याम अग्रवाल ने सभी संतों का फूलमाला पहनाकर स्वागत किया और आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर अनेक संत महंत व श्रद्धालु भक्त मौजूद रहे।


