हरिद्वार, 24 अगस्त। एक राष्ट्र-एक चुनाव को लेकर हरिद्वार में प्राचीन अवधूत मंडल आश्रम, ज्वालापुर स्थित श्रीजी वाटिका में आयोजित संत समागम की सफलता पर करौली शंकर दास महाराज ने केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, स्वामी रामदेव सहित संत-समाज को इस सार्थक पहल पर साधुवाद व शुभकामनाएं प्रदान की।
संत समागम के माध्यम से तीर्थनगरी हरिद्वार में हुई इस सार्थक पहल को देश के कोने-कोने के संत समाज व आम जनमानस से जोड़ने के लिए करौली शंकर धाम राष्ट्रव्यापी अभियान अपने अनुयायियों व शाखाओं के माध्यम से चलायेगा। यह विचार प्रेस को जारी बयान में श्री पंचायती अखाड़ा नया उदासीन के महामंडलेश्वर करौली शंकर महाराज ने एक राष्ट्र-एक चुनाव के समर्थन में अपना स्पष्ट और तर्कपूर्ण दृष्टिकोण रखते हुए व्यक्त किये।
म.मं. करौली शंकर ने कहा कि भारत में धर्मगद्दी और राजगद्दी ने हमेशा राष्ट्रहित के विषयों पर मार्गदर्शन और विचार-विमर्श की परंपरा निभाई है। उनके अनुसार, संतों और सरकार का राष्ट्रीय विषय पर एक मंच पर चिंतन करना देश और दुनिया के लिए सकारात्मक संदेश है। एक राष्ट्र-एक चुनाव को लेकर उठ रही आशंकाओं पर करौली शंकर ने कहा कि इस विषय को राजनीतिक दलों के हित से ऊपर उठकर राष्ट्रहित के नजरिए से देखना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत में अलग-अलग भाषाओं और संस्कृतियों के बावजूद राष्ट्र एक है, इसलिए पूरे देश में एक साथ चुनाव कराने की व्यवस्था पर विचार किया जा सकता है।
उन्होंने यह भी याद दिलाया कि देश में पहले लोकसभा और विधानसभा चुनाव साथ-साथ होने की व्यवस्था रही है। करौली शंकर ने कहा कि इस बहस का सबसे बड़ा मुद्दा चुनावी खर्च की बचत नहीं होना चाहिए। उनके शब्दों में प्राथमिकता यह होनी चाहिए कि देश आगे बढ़े, लोकतंत्र मजबूत हो और देश सुरक्षित रहे। उन्होंने कहा कि विकसित राष्ट्र की दिशा में एक राष्ट्र-एक चुनाव देश के लिए सार्थक और जरूरी कदम साबित होगा।
उन्हांेने कहा कि विपक्षी दलों की यह आशंका निमूल है कि एक साथ लोकसभा और विधानसभा चुनाव होने से एक ही राजनीतिक दल को फायदा होगा। इसका देश के मतदाताओं ने समझदारी से समाधान किया है। पूर्व में जब दिल्ली में लोकसभा व विधानसभा के चुनाव आस-पास हुए तो लोकसभा में सभी सीटें भाजपा को मिली वहीं विधानसभा में आम आदमी पार्टी को जीत मिली। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान को लेकर भी स्पष्ट नीति होनी चाहिए। राष्ट्रगान या राष्ट्रगीत के अपमान के दोषी पाए जाने वालों के मताधिकार पर भी कार्रवाई पर विचार किया जाना चाहिए।
एक राष्ट्र-एक चुनाव को केवल राजनीतिक दलों के फायदे-नुकसान से नहीं, बल्कि देश की प्रगति, लोकतंत्र की मजबूती और मतदाता के विवेक के नजरिए से देखा जाना चाहिए। उन्हांेने कहा कि हरिद्वार का यह संत समागम इसी व्यापक राष्ट्रीय विमर्श में संत समाज की भागीदारी और उनके दृष्टिकोण को सामने लाने वाला महत्वपूर्ण मंच बना। इस विमर्श का निश्चित रूप से समूचे राष्ट्र में सार्थक संदेश जायेगा, इसके लिए आयोजकों का प्रयास सराहनीय है।


