अमरीश
हरिद्वार, 22 जून। श्री राधा रसिक बिहारी भागवत परिवार के तत्वाधान में माता का डेरा ज्वालापुर में श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ कलश यात्रा के साथ किया गया। प्रथम दिवस की कथ का श्रवण कराते हुए भागवताचार्य पंडित पवन कृष्ण शास्त्री ने बताया इस कलिकाल में जो भी सच्ची श्रद्धा एवं भक्ति के साथ श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन एवं श्रवण करता है। भागवत की कृपा से उसे धन-धान्य के साथ भक्ति ज्ञान एवं वैराग्य की प्राप्ति होती है। समस्त पित्रों को मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है। शास्त्री ने श्रीमद्भागवत महात्म्य में धुंधकारी का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि धुंधकारी ने जीवन पर्यन्त कोई सत्कर्म व पुण्य कर्म नहीं किया। मृत्यु के बाद धुंधकारी को प्रेत योनि प्राप्त हुई। धुंधकारी के भाई गोकर्ण धुंधकारी की मुक्ति के लिए श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन कराया।
कथा के प्रभाव से धुंधकारी प्रेत योनि से मुक्त हो गया और उसे भगवान के लोक वैकुंठ में स्थान प्राप्त हुआ। बैकुंठ धाम को जाते हुए धुंधकारी ने कहा कि प्रेत योनि से मुक्ति दिलाने वाली श्रीमद्भागवत कथा धन्य है। इसलिए पितृ दोष दूर करने के लिए भागवत कथा आयोजन एवं श्रवण अवश्य करना चाहिए। इस अवसर पर मुख्य यजमान कमलेश मदान, नरेश मनचंदा, राजू मनचंदा, राकेश नागपाल, मुकेश चावला, अमित गेरा, संजय सचदेवा, दीपक बजाज, नीरू, रीना, भावना, लक्की, कविता, मंजू, कमल, कनिका, सुषमा, कविता, रेणु, आशा, जिज्ञांशा, ऋषभ, आयुषा, ललिता गेरा, बाला शर्मा, दर्शना छाबरा, आचार्य महेशचंद्र जोशी, पंडित रामचंद्र तिवारी, पंडित गणेश कोठारी आदि ने भागवत पूजन किया।


