वज्र के समान हो जाता है तीर्थ पर किया गया पाप कर्म-पंडित पवन कृष्ण शास्त्री

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ब्यूरो


हरिद्वार, 5 नवम्बर। बसंत विहार कॉलोनी ज्वालापुर में श्री राधा रसिक बिहारी भागवत परिवार सेवा ट्रस्ट के तत्वाधान में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिवस की कथा श्रवण कराते हुए तीर्थो पर किया गया पाप ब्रज के समान हो जाता है। पाप कर्म करने वाले को अनेक जन्मों तक नरक की यातना भोगनी पड़ती है। शास्त्री ने कहा कि मनुष्य योनि में जन्म लेने के उपरांत मन वाणी एवं कर्म से मनुष्य जाने अनजाने में पाप कर्म कर बैठता है। पाप कर्म की निवृत्ति तीर्थ यात्रा करने, तीर्थ पर दान पुण्य करने और तीर्थ पर श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करने हो जाती है। परंतु जो लोग तीर्थ पर जाकर पाप कर्म करते हैं।

उनका पाप वज्र के समान कठोर हो जाता है। इसलिए तीर्थ की मर्यादा और नियमों का पालन करते हुए कभी भी पाप कर्म नहीं करना चाहिए। शास्त्री ने कहा कि तीर्थयात्रा के दौरान भूमि पर शयन करे। यज्ञ और दान पुण्य करें। तीर्थ के नियमों और मर्यादा का पालन करने से ही तीर्थ यात्रा का पुण्य फल प्राप्त होता है। यदि सामर्थ्य हो तो किसी तीर्थ स्थल श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन करें। कन्या पूजन कर ब्राह्मण भोजन और भंडारे का आयोजन करना चाहिए।

ऐसा करने से लोक एवं परलोक दोनों सुधर जाते हैं और समस्त पित्रों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। मुख्य यजमान गुलाटी परिवार, वीना धवन, शांति दर्गन, पिंकी दर्गन, स्वेता, सुमित, पंडित गणेश कोठारी, रंजना, अंजू पांधी, मुकेश दर्गन, प्रमोद, लवी सचदेवा, संजीव गोयल, राजीव गोयल, संजय दर्गन, संगम आदि भागवत पूजन किया।

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