भारतीय धीमान ब्राह्मण महासभा का स्थापना दिवस एवं राष्ट्रीय अधिवेशन आयोजित

Haridwar News
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एकजुटता से ही समाज को आगे बढ़ाया जा सकता है-सुंदरलाल धीमान
भगवान विश्वकर्मा एवं महर्षि अंगिरा के दिखाए मार्ग का अनुसरण करते हुए समाज को आगे बढ़ाने में योगदान करें-अरूण धीमान

हरिद्वार, 2 अक्टूबर। भारतीय धीमान ब्राह्मण महासभा का छठा स्थापना दिवस एवं राष्ट्रीय अधिवेशन सैनी आश्रम में आयोजित किया गया। अधिवेशन में महासभा के विभिन्न प्रांतों के पदाधिकारियों, समाज के प्रबुद्धजनों और कार्यकर्ता शामिल हुए। महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुंदरलाल धीमान, प्रदेश अध्यक्ष अरूण धीमान व अन्य पदाधिकारियों ने भगवान विश्वकर्मा एवं महर्षि अंगिरा के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित और माल्यार्पण कर अधिवेशन का शुभारंभ किया।

अधिवेशन में महासभा के आगामी कार्यक्रमों, सामाजिक एकजुटता, शिक्षा और युवाओं को समाज से जोड़ने सहित विभिन्न विषयों पर चर्चा की गई। राष्ट्रीय अध्यक्ष सुंदर लाल धीमान ने समाज की एकजुटता और विकास पर जोर देते हुए कहा कि एकजुटता से ही समाज को आगे बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि शिक्षा से ही सभी समस्याओं का समाधान संभव है। बालिकाओं की शिक्षा पर खासतौर पर ध्यान दिया जाना चाहिए। बालिकाओं को शिक्षा और आगे बढ़ने के समान अवसर उपलब्ध कराएं।

मुख्य अतिथी वैद्य एमआर शर्मा ने महासभा द्वारा किए जा रहे कार्यो की सराहना करते हुए कहा कि समाज की एकता ही संगठन की शक्ति है। युवा देश और समाज का भविष्य हैं। युवा वर्ग को समाज के महापुरूषों के जीवन दर्शन से अवगत कराएं और उनके दिखाए मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करें। प्रदेश अध्यक्ष अरुण धीमान ने संगठन द्वारा समाज के हित में किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी और अतिथीयों सहित सभी लोगों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से जोड़ने, आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की मदद करने और सामाजिक एकता को मजबूत करने के लिए निरंतर कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि भगवान विश्वकर्मा एवं महर्षि अंगिरा के दिखाए मार्ग का अनुसरण करते हुए समाज को आगे बढ़ाने में योगदान करें।

उपाध्यक्ष रामकुमार शर्मा, सचिव राजकुमार शर्मा, कोषाध्यक्ष ओम कैलाश, संस्थापक केदारनाथ धीमान और राष्ट्रीय सचिव गोपाल सहित अन्य पदाधिकारियों ने भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम में विभिन्न राज्यों और जिलों के पदाधिकारी, संरक्षक मंडल एवं मातृशक्ति मौजूद रही। की उपस्थिति रही।

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