बार-बार मांग करने के बाद भी नहीं किया जा रहा जर्जर सड़क का निर्माण-विपिन गुप्ता
हरिद्वार, 23 नवम्बर। राजलोक विकास सेवा समिति राजलोक कालोनी ज्वालापुर एवं आसपास के स्थानीय लोगों ने सिंचाई विभाग उत्तराखंड के विरोध में नारेबाजी की व कई वर्षों से टूटी सराय बायपास रोड बनवाने मांग की।
राजलोक विकास सेवा समिति के अध्यक्ष विपिन गुप्ता ने कहा कि ज्वालापुर के हरिलोक तिराहे से होकर सराय गांव होते हुए एक्कड़ तक जाने वाली सराय बाईपास रोड पिछले लगभग चार वर्षों से अत्यंत जर्जर अवस्था में है। सड़क पर गहरे-गहरे गड्ढे बन चुके हैं, जिससे प्रतिदिन आने-जाने वाले वाहन चालकों को भारी असुविधा और दुर्घटनाओं का सामना करना पड़ रहा है। सचिव धीरेंद्र कुमार ने कहा कि उक्त सड़क सिंचाई विभाग उत्तराखंड के अधीन आती है। वर्ष 2019 में जब स्वीडन के राजा सराय गांव में कूड़ा प्लांट के शिलान्यास हेतु पधारे थे, तब मात्र औपचारिकता हेतु सड़क की ऊपरी सतह को अस्थाई रूप से ठीक किया गया था।
इसके पश्चात् विभाग द्वारा अब तक कोई स्थायी मरम्मत या निर्माण कार्य नहीं किया गया। शहर व्यापार मंडल के महामंत्री विक्की तनेजा ने कहा कि इस विषय पर विभाग को अनेक बार पत्राचार, सीसीआर बैठक तथा अन्य माध्यमों से अवगत कराया गया, किंतु आज तक कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई। गत वर्ष शासन-प्रशासन द्वारा सड़क के लिए लगभग 12 लाख की धनराशि स्वीकृत की गई थी, जिसके अंतर्गत केवल गड्ढों में मलबा व बजरी डालकर अस्थाई सुधार किया गया। किंतु पहली ही वर्षा में सड़क पुनः पहले जैसी हो गई। उपाध्यक्ष राजलोक समिति रणदीप राणा और रंजीत सिंह ने कहा कि सहायक अभियंता, सिंचाई विभाग द्वारा अगस्त 2023 में यह आश्वासन दिया गया था कि बरसात के बाद सड़क का पूर्ण निर्माण कार्य किया जाएगा। परंतु वर्ष 2025 की बरसात बीत जाने के बाद भी न तो सड़क का निर्माण हुआ और न ही स्थायी मरम्मत।
केवल कुछ स्थानों पर पेच वर्क कर दिया गया था, और टायल लगाया गया था, टायल के कुछ हिस्से को छोड़कर बाकी सब पेच वर्क अब पुनः उखड़ चुका है, और स्थिति पहले से अधिक गंभीर है। समिति के संरक्षक बृज मोहन सिंह एवं विष्णु लोक कालोनी के विपिन जोशी ने कहा यह सड़क 80 से अधिक गाँवों को जोड़ती है तथा 30 से अधिक आवासीय कालोनियां (हरिलोक, राजलोक, दक्ष, संदेश विहार, रतन विहार, शांति विहार, रुक्मिणी गार्डन आदि) इसी मार्ग पर स्थित हैं। साथ ही 4 विद्यालय और अनेक व्यावसायिक प्रतिष्ठान भी इसी मार्ग के आसपास हैं। आए दिन ई-रिक्शा पलटने व दोपहिया वाहनों की दुर्घटनाओं की घटनाएं आम हो चुकी हैं। बरसात के समय गड्ढों में पानी भर जाने से सड़क की वास्तविक स्थिति दिखाई नहीं देती। जिससे गंभीर दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है।
स्थानीय निवासी जय किशन शर्मा ने कहा कि स्थानीय जनता विगत चार वर्षों से इस जर्जर सड़क के कारण भारी असुविधा झेल रही है। विशेष रूप से मरीजों और गर्भवती महिलाओं को अस्पताल तक पहुंचने में अत्यधिक कठिनाई होती है। गड्ढा मुक्त सड़क के सरकारी आदेशों के बावजूद यह लगभग 3 किलोमीटर का मार्ग अब तक यथावत टूटा हुआ पड़ा है।
प्रदर्शन करने वालों में योगेंद्र शर्मा, अमित गोयल, पंकज गुप्ता, राजन चौधरी, अमित ठाकुर, रचित सहगल, मुकेश गुप्ता, वरिष्ठ नागरिक बीके सुयाल, मोहित शर्मा, गौरव वालिया, पंकज कुमार गुप्ता, अंकुर गुप्ता, विवेक मित्तल, प्रमोद तनेजा, संजय सिंह, सुमित गुप्ता, मास्टर सुनित, अंकित गुप्ता, दीपक छाबड़ा, अमित कुमार, संजय, अजय सिंह सहित बड़ संख्या में स्थानीय लोग शामिल रहे।


