भगवान श्रीकृष्ण का वांग्मय स्वरूप है श्रीमद्भागवत कथा-पंडित पवन कृष्ण शास्त्री

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हरिद्वार, 2 जून। श्री राधा रसिक बिहारी भागवत परिवार सेवा ट्रस्ट द्वारा पुरूषोत्तम मास के अवसर पर श्री राधा रसिक बिहारी मंदिर रामनगर कालोनी ज्वालापुर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन कथाव्यास भागवताचार्य पंडित पवन कृष्ण शास्त्री ने श्रद्धालु भक्तों को शुकदेव आगमन, राजा परीक्षित संवाद और धुंधुकारी मोक्ष प्रसंग का श्रवण कराया। कथाव्यास पंडित पवन कृष्ण शास्त्री ने कहा कि श्रीमद्भागवत कोई साधारण ग्रंथ नहीं, बल्कि साक्षात् भगवान श्रीकृष्ण का वांग्मय स्वरूप है।

पुरुषोत्तम मास में इसका श्रवण और भी अधिक फलदायी हो जाता है। उन्होंने कहा कि जब मनुष्य के पूर्व जन्मों के पुण्य उदय होते हैं, तब उसे भागवत कथा सुनने का सौभाग्य प्राप्त होता है। इसके श्रवण मात्र से ही जीव के जनम-जनम के पाप और संताप मिट जाते हैं। धुंधुकारी मोक्ष का प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने कहा कि महापापी धुंधुकारी को प्रेत योनि से मुक्ति दिलाने के लिए उसके भाई गोकर्ण ने भागवत कथा का आयोजन किया। कथा के प्रभाव से सात गांठों वाला बांस फट गया और धुंधुकारी दिव्य रूप धारण कर बैकुंठ धाम को गया।

इस अवसर पर शांति दर्गन, वीना धवन, रशमी गोस्वामी, शिमला उपाध्याय, किरन शर्मा, भारत भूषण शर्मा, विनोद ठाकुर, राहुल ठाकुर, लक्ष्मी शर्मा, महेंद्र शर्मा, वंदना गुप्ता, मीनू चौधरी, रिंकू शर्मा, रीना जोशी, वंदना अरोड़ा, मीनू शर्मा, रेखा आर्य, ममता शर्मा, सौरव शर्मा, पूनम राजू, पंडित आदित्य जगूड़ी, पंडित सचिन पैन्यूली ने भागवत पूजन किया।

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