गुरुकुल में किया आयुर्वेद वेदना प्रबंधन कार्यक्रम का आयोजन

Haridwar News
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उत्तराखंड को आयुष प्रदेश बनाने के लिए संकल्पबद्ध है सरकार-मदन कौशिक
हरिद्वार, 8 सितम्बर। उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय के गुरुकुल परिसर में आयुर्वेद में वेदना प्रबंधन का प्रारंभ हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथी आयुष एवं आयुष शिक्षा मंत्री मदन कौशिक ने दीप प्रज्वलित कर किया। मदन कौशिक ने कहा कि उत्तराखंड को आयुष प्रदेश बनाने के लिए सरकार कृत संकल्प है। आयुष को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में अनेक कार्य किये जा रहे हैं। जिससे रोगियों, विद्यार्थियों और जन सामान्य को लाभ पहुंच सके।

उन्होंने कहा कि आयुर्वेद को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यकताओं की पहचान और रिसर्च के माध्यम से डाटा संग्रह करने के साथ रिकॉर्ड मेंटेन करने की आवश्यकता है। रिकॉर्ड मेंटेन करके विश्व के सामने प्रस्तुत करेंगे तो इसकी विश्वसनीयता में वृद्धि होगी और साथ ही रोगियों को और अधिक सही तरीके से स्वस्थ कर पाएंगे। विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए उन्होंने कहा कि अपनी दिनचर्या को व्यवस्थित करते हुए अध्ययन करें।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर अरुण कुमार त्रिपाठी ने आयुर्वेद में वेदना प्रबंधन विषय पर प्रकाश डाला और वेदना के वात पित्त और कफ के संबंध में जानकारी दी। अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान के प्रोफेसर और आरोग्य भारती के राष्ट्रीय सचिव ने आयुर्वेद में एआई के प्रयोग के साथ-साथ उत्पन्न होने और वेदना में आयुर्वेदिक द्रव्यों के शरीर पर कार्य किए जाने के वैज्ञानिक स्वरूप पर विस्तार से प्रकाश डाला और बताया कि आयुर्वेद की औषधियों में अल्कलॉइड्स किस प्रकार से काम करते हैं और भविष्य में शोध की दिशा क्या होगी।

स्वामी राम प्रकाश हॉस्पिटल के डायरेक्टर एवं वरिष्ठ चिकित्सक डा.संजय शाह ने कहा कि यदि मन की शक्तियों को हम कंट्रोल कर लेते हैं तो जमा की अनुभूति कम होती चली जाती है और इस विषय पर हॉस्पिटल में विभिन्न रोगियों पर किए गए चिकित्सा अनुभव से भी उन्होंने उपस्थित शोधार्थियों को अवगत कराया। डा.राज तायल ने वेदना रहित जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आयुर्वेद में वेदना प्रबंधन को विस्तार से वर्णित किया गया है।

इस विषय पर चिकित्सकों एवं शिक्षकों को गंभीरता पूर्वक कार्य करने की आवश्यकता है।कार्यक्रम में एमडी के 10 शोधार्थियों के शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। डा.अवधेश कुमार, डा.देवेश शुक्ला त्रिपाठी, डा.बालकृष्ण पवार, विकास सूर्यवंशी, डा. ओमप्रकाश जोशी, डा.राजीव कुरेले एवं उत्तराखंड आरोग्य भारती के अध्यक्ष विनोद कुमार मित्तल मौजूद रहे।

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