हरिद्वार में 55 वर्षीय बीमार हाथी की मौत, बचाने के लिए वन विभाग और विशेषज्ञों ने किए तमाम प्रयास; पोस्टमार्टम में सामने आया हार्ट संबंधी गंभीर रोग

Haridwar News
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हरिद्वार। हरिद्वार वन प्रभाग की देवपुरा बीट में एक करीब 55 वर्षीय जंगली हाथी की उपचार के दौरान मौत हो गई। हाथी की तबीयत बिगड़ने पर वन विभाग, भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII), WWF के विशेषज्ञों और अनुभवी वन्यजीव पशु चिकित्सकों की संयुक्त टीम ने उसे बचाने के लिए हरसंभव प्रयास किए। हाथी को ऑक्सीजन, सीपीआर, दवाइयां और आपातकालीन पशु चिकित्सा उपचार भी उपलब्ध कराया गया, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद उसकी जान नहीं बचाई जा सकी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हाथी की मौत का कारण हृदय संबंधी गंभीर बीमारी सामने आई है।

वन विभाग की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, देवपुरा बीट में हाथियों की लगातार निगरानी के दौरान इस हाथी की गतिविधियां हरिद्वार शहर और आसपास की मानव बस्तियों के बेहद नजदीक देखी जा रही थीं। यह हाथी नियमित रूप से आबादी वाले क्षेत्रों और कृषि भूमि में विचरण करता था। कई बार इसे हरिद्वार शहर की ओर आते हुए भी देखा गया था। ऐसे में मानव सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए हाथी और इंसानों के बीच संभावित संघर्ष की आशंका बनी हुई थी।

मानव-हाथी संघर्ष की आशंका के चलते किया गया था चिह्नित

हाथी की लगातार आबादी वाले क्षेत्रों में आवाजाही को देखते हुए हाथी मॉनिटरिंग टास्क फोर्स ने उसे चिह्नित किया था। वन विभाग की टीम उसकी गतिविधियों पर नजर रख रही थी, ताकि किसी भी संभावित मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोका जा सके। हाथी की उम्र अधिक होने और उसकी गतिविधियों को देखते हुए उसकी निगरानी भी लगातार की जा रही थी।

विशेषज्ञों की टीम ने डार्ट कर शुरू किया था उपचार

वन विभाग के मुताबिक, 6 नवंबर को भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) के वरिष्ठ वैज्ञानिकों, WWF के विशेषज्ञों, अनुभवी वन्यजीव पशु चिकित्सकों और वन विभाग की संयुक्त टीम ने हाथी को विशेषज्ञों की देखरेख में डार्ट किया। इसके बाद वैज्ञानिकों और वरिष्ठ पशु चिकित्सकों की निगरानी में हाथी की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही थी।

इसी दौरान अचानक हाथी की तबीयत बिगड़ गई। स्थिति गंभीर होते ही चिकित्सकों ने तत्काल आपातकालीन उपचार शुरू किया। हाथी को ऑक्सीजन दी गई और उसकी हालत सुधारने के लिए सीपीआर, निर्धारित रिवर्सल दवाइयां और नसों के माध्यम से तरल पदार्थ (IV Fluids) उपलब्ध कराए गए। इसके साथ ही चिकित्सकों की टीम ने लगातार आपातकालीन पशु चिकित्सा उपचार जारी रखा।

हालांकि, चिकित्सकों के अथक प्रयासों के बावजूद हाथी की स्थिति में सुधार नहीं हो पाया। अंततः पशु चिकित्सा अधिकारियों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

पोस्टमार्टम में सामने आया हृदय संबंधी गंभीर विकार

हाथी की मौत के कारणों का पता लगाने के लिए स्वतंत्र पशु चिकित्सक विशेषज्ञों के दल से पोस्टमार्टम कराया गया। पोस्टमार्टम में हाथी की उम्र करीब 55 वर्ष आंकी गई। जांच के दौरान सामने आया कि हाथी बाहर से सामान्य दिखाई दे रहा था, लेकिन उसके आंतरिक अंगों की जांच में पहले से हृदय संबंधी गंभीर विकार मौजूद होने की पुष्टि हुई।

विशेषज्ञों के अनुसार, हाथी के हृदय में मायोकार्डियल फाइब्रोसिस और कार्डियोमायोपैथी जैसे बदलाव पाए गए। इन हृदय संबंधी विकारों के कारण ही उसकी मौत हुई। चिकित्सकीय परीक्षण में यह भी स्पष्ट हुआ कि इस तरह की गंभीर आंतरिक बीमारियों का पता केवल दूर से किए गए सामान्य बाहरी निरीक्षण के आधार पर लगाना संभव नहीं होता।

55 साल की उम्र को माना जाता है अधिक वृद्धावस्था

वन विभाग की जानकारी के अनुसार, सामान्यतः जंगली हाथियों का औसत जीवनकाल करीब 50 से 60 वर्ष होता है। इस लिहाज से पोस्टमार्टम में हाथी की आंकी गई करीब 55 वर्ष की उम्र अत्यधिक वृद्धावस्था की श्रेणी में आती है। उम्र अधिक होने के साथ पहले से मौजूद हृदय संबंधी विकार भी उसकी गंभीर स्थिति का कारण बने।

वन विभाग, WII और WWF की टीम ने किए बचाने के प्रयास

वन विभाग ने इस घटना को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। विभाग के अनुसार, हाथी की जान बचाने के लिए वन विभाग, भारतीय वन्यजीव संस्थान, WWF और अनुभवी पशु चिकित्सकों की पूरी टीम ने समन्वय के साथ हरसंभव प्रयास किए। अचानक स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद तत्काल चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं, लेकिन हृदय संबंधी गंभीर विकारों के चलते हाथी को बचाया नहीं जा सका।

इस घटना ने एक बार फिर वन्यजीवों की बढ़ती उम्र, उनकी स्वास्थ्य निगरानी और मानव-हाथी संघर्ष की आशंकाओं के बीच वन विभाग के सामने आने वाली चुनौतियों को उजागर किया है।

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