विडियो:-गंगा बंदी में भी तलहटी से तलाश रहे रोजगार, सिक्के और धातुएं बीनकर चला रहे परिवार

Haridwar News
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हर की पैड़ी पर गंगा की धारा थमते ही बढ़ी लोगों की हलचल, किस्मत साथ दे तो मिल जाते हैं सोने-चांदी के आभूषण
हरिद्वार। धर्मनगरी हरिद्वार में दशहरा से दीपावली तक गंगा बंदी के दौरान जहां गंगा घाटों पर होने वाले कई कामकाज प्रभावित हो जाते हैं, वहीं निम्न आय वर्ग के लोगों के लिए गंगा की तलहटी रोजगार का जरिया बन जाती है। हर की पैड़ी पर इन दिनों गंगा की जलधारा कम होने या दिखाई नहीं देने के बाद सैकड़ों लोग तलहटी में सिक्के और अन्य धातुएं तलाशते नजर आ रहे हैं। साल भर श्रद्धालुओं की ओर से गंगा में अर्पित की जाने वाली वस्तुओं को खोजकर ये लोग अपने परिवार की आजीविका चलाने की कोशिश करते हैं।

गंगा बंदी के दौरान हर की पैड़ी का नजारा इन दिनों कुछ अलग दिखाई दे रहा है। जहां सामान्य दिनों में गंगा की लहरों के बीच श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगाते हैं, जलधारा के हटने के बाद तलहटी में लोगों की भीड़ जुट रही है। हाथों से मिट्टी और कंकड़-पत्थरों को खंगालते ये लोग सिक्कों, धातुओं और अन्य कीमती वस्तुओं की तलाश में घंटों मेहनत करते हैं। इनके लिए गंगा की तलहटी केवल धार्मिक आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि रोजी-रोटी जुटाने का एक सहारा भी है।
इन लोगों को उम्मीद रहती है कि तलहटी में तलाश के दौरान कुछ ऐसे सिक्के या धातुएं मिल जाएं, जिन्हें बेचकर परिवार की जरूरतें पूरी की जा सकें। कभी-कभी किस्मत साथ देने पर सोने या चांदी का आभूषण भी मिल जाता है। हालांकि, हर दिन की मेहनत से कितनी कमाई होगी, यह निश्चित नहीं होता। इसके बावजूद कई लोग गंगा बंदी के इस दौर में इसी उम्मीद के सहारे अपनी आजीविका चलाते हैं।



गंगा सभा के तीर्थ पुरोहित उज्ज्वल पंडित का कहना है कि गंगा को मां का दर्जा दिया गया है और मां हमेशा अपनी संतानों का ध्यान रखती है। उन्होंने कहा कि मां गंगा साल भर लोगों को रोजगार देती हैं। दशहरा से दीपावली तक गंगा बंदी के कारण जब हर की पैड़ी पर जलधारा दिखाई नहीं देती, तब भी श्रद्धालुओं की ओर से अर्पित किए गए सिक्के और धातुएं जरूरतमंद परिवारों की आजीविका का सहारा बनती हैं।

हरिद्वार में गंगा बंदी के दौरान तलहटी में सिक्के और धातुएं तलाशते लोगों की तस्वीर आस्था, परंपरा और आजीविका के आपसी संबंध को उजागर करती है। गंगा की लहरों के बीच हो या जलधारा के हटने के बाद, यहां के कई परिवारों की उम्मीदें मां गंगा से जुड़ी रहती हैं। उनके लिए यह समय जहां मेहनत और संघर्ष का है, वहीं परिवार का खर्च चलाने के लिए अतिरिक्त कमाई की उम्मीद भी लेकर आता है।

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