हाथियों की निगरानी के लिए रेडियो कॉलरिंग, वॉच टावर और 24 घंटे सक्रिय कंट्रोल रूम बनाने की भी है योजना
हरिद्वार, 28 अक्टूबर। आगामी कुंभ मेले को लेकर वन विभाग ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। कुंभ मेले के दौरान हाथियों की आबादी में आवाजाही रोकने के लिए सोलर फेंसिंग, हाथी रोधी खंदक, वॉच टावर, रेडियो कॉलरिंग और अर्ली वार्निंग सिस्टम जैसी व्यवस्थाएं विकसित की जा रही हैं। साथ ही वन्यजीवों से जुड़ी किसी भी आपात स्थिति में तत्काल कार्रवाई के लिए 24 घंटे सक्रिय रहने वाला कंट्रोल रूम स्थापित करने की तैयारी भी की जा रही है। डीएफओ स्वप्निल अनिरुद्ध्र ने बताया कि कुंभ क्षेत्र के आसपास वन्यजीवों की आवाजाही को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जा रही है।
मेला क्षेत्र में श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ वन्यजीवों को भी उनके प्राकृतिक आवास में सुरक्षित रखना है। कुंभ मेले के दौरान टेंट सिटी, पार्किंग स्थलों और अन्य स्थानों पर बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी रहती है। जंगलों से हाथियों की आवाजाही के कारण ऐसे क्षेत्रों में मानव-वन्यजीव संघर्ष का खतरा बना रहता है। इसे देखते हुए वन विभाग ने संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा इंतजाम करने की योजना बनाई है। इसके तहत सिंचाई विभाग के सहयोग से लगभग 8.5 किलोमीटर लंबी सोलर फेंसिंग और हाथी रोधी खंदक (ट्रेंच) तैयार की जा रही है।
सोलर फेंसिंग और खंदक के जरिए संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा घेरा तैयार किया जा रहा है। वन्यजीवों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने के लिए क्षेत्र में एक प्रमुख वॉच टावर का निर्माण किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि हाथियों की गतिविधियों की जानकारी समय रहते प्राप्त करने के लिए रेडियो कॉलरिंग और अर्ली वार्निंग सिस्टम पर भी काम किया जा रहा है। रेडियो कॉलर के माध्यम से चिह्नित हाथियों की गतिविधियों की निगरानी करने में मदद मिलती है। इससे उनकी आवाजाही के पैटर्न को समझने और संवेदनशील क्षेत्रों की ओर बढ़ने की स्थिति में संबंधित टीमों को पहले से सतर्क करने की व्यवस्था विकसित की जा सकती है।
अर्ली वार्निंग सिस्टम के माध्यम से संभावित खतरे की जानकारी मिलने और मौके पर कार्रवाई शुरू होने के बीच लगने वाले समय को कम करने में मदद मिलेगी। विभाग द्वारा 24 घंटे सक्रिय रहने वाला कंट्रोल रूम स्थापित करने की तैयारी भी की जा रही है। इसका दायरा केवल हाथियों तक सीमित नहीं रहेगा। हाथी के अलावा तेंदुआ, सांप, मगरमच्छ या अन्य वन्यजीवों के आबादी वाले क्षेत्रों में पहुंचने की सूचना प्राप्त होने पर संबंधित कर्मचारियों और रेस्क्यू टीमों को मौके पर भेजने और त्वरित कार्रवाई करने में मदद मिलेगी।




