संसार में करुणा एवं मैत्री भाव का संचार करने के लिए अवतार लेते हैं भगवान-स्वामी विज्ञानानंद सरस्वती

Dharm
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हरिद्वार, 24 जुलाई। श्रीगीता विज्ञान आश्रम के परमाध्यक्ष महामंडलेश्वर स्वामी विज्ञानानंद सरस्वती ने कहा कि संसार में करुणा एवं मैत्री भाव का संचार करने के लिए भगवान स्वयं अवतरित होते हैं। जबकि मनुष्य को कर्म करने के लिए जन्म लेना पड़ता है। भगवान के जन्मोत्सव में जिन भक्तों को सम्मिलित होने का सौभाग्य प्राप्त होता है। उनका परिवार सदैव संतान सुख से ओतप्रोत रहता है।

राजा गार्डन स्थित श्री हनुमान मंदिर सत्संग भवन में व्यास पूर्णिमा के उपलक्ष में आयोजित भागवत कथा में भगवान के अवतार का वर्णन करते हुए स्वामी विज्ञानानंद सरस्वती ने भगवान श्रीकृष्ण को श्रीहरि का संपूर्ण अवतारी बताते हुए कहा कि एक साथ दो माता एवं दो पिता को पुत्र रूप में दर्शन देकर अभिभूत करने का काम भगवान ही कर सकते हैं। इससे पूर्व वामन अवतार एवं नरसिंह अवतार की कथा के साथ ही श्रीराम जन्म की कथा का विस्तार पूर्वक वर्णन किया। सभी भक्तों ने भगवान के बालरूप की आरती उतार कर विश्व कल्याण की कामना की तथा आयोजकों ने माखन मिश्री का भोग लगाकर प्रसाद वितरित किया।

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