ब्यूरो
हरिद्वार, 14 अप्रैल। श्री दरिद्र भंजन महादेव मंदिर कनखल में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के सातवें दिन भागवताचार्य पंडित पवन कृष्ण शास्त्री ने सुदामा चरित्र का श्रवण कराते हुए बताया संतोषी कभी दरिद्र नहीं होता। सुदामा परम संतोषी ब्राह्मण थे। हमेशा भगवान का धन्यवाद कहते थे। उन्होंने बताया कि कृष्ण और सुदामा की मित्रता संदीपनी मुनि के गुरूकुल में अध्यन के दौरान हुई थी। अध्ययन के बाद दोनों अपने-अपने घर चले गए। आगे चलकर कृष्ण द्वारिकापुरी के राजा द्वारिकाधीश बन गए। परंतु सुदामा बहुत ही दयनीय स्थित में पत्नी सुशीला एवं दो बच्चों के साथ झोपड़ी में निवास करते थे। परंतु भगवान से कभी कुछ नहीं मांगते थे।
हमेशा भगवान श्रीकृष्ण की मित्रता को याद करते हुए उनकी भक्ति किया करते थे। लेकिन कभी भी श्रीकृष्ण से किसी भी प्रकार की याचना नहीं करते थे। एक बार पत्नी के कहने पर सुदामा एक पोटली में दस मुट्ठी चावल लेकर श्रीकृष्ण से मिलने के लिए द्वारिकापुरी पहुंचे। श्री कृष्ण ने द्वारिकापुरी में सुदामा का बहुत आदर सत्कार किया। श्री कृष्ण जानते थे कि सुदामा मुझसे कभी कुछ नहीं मांगेंगे। इसलिए श्रीकृष्ण ने सुदामा के द्वारा लाए चावलों में से एक मुट्ठी चावल अपने मुख में डाला और ऊपर के सातों लोक और दूसरी मुट्ठी में नीचे के सातों लोक सुदामा के नाम कर दिए।
सुदामा जब द्वारिकापुरी से वापस अपने गांव पहुंचे तो अपनी झोंपड़ी की जगह महल देखकर उन्हें बहुत आश्चर्य हुआ और कहने लगे कि फैलाई जिसने झोली तेरे दरबार में आकर एक बार, तुझे देता नहीं देखा मगर झोली भरी देखी। शास्त्री ने बताया कि भगवान अपने भक्तों को अपना सर्वस्व अर्पण कर देते हैं। भगवान की भक्ति करने वालों पर कभी किसी चीज की कमी नहीं रहती। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को मन में संतोष धारण कर निष्काम भाव से भगवान की भक्ति करनी चाहिए। इस अवसर पर मुख्य यजमान सरिता गुप्ता, अजय गुप्ता, कोमल गुप्ता, विजय गुप्ता, कामनी गुप्ता, कुसुम गुप्ता, दिनेश गुप्ता, सुनीता गुप्ता, सीमा गुप्ता, सोमेश गुप्ता, विकाश गुप्ता, रुचि गुप्ता, रिंकू गुप्ता, डीके गुप्ता, रितेश गुप्ता, नीरज शर्मा, विमल गुप्ता, सुनीता गुप्ता, सुनील गुप्ता, सत्यम, शिवाय, चिराग, कार्तिक, आरवी, माधव, अनिया, पंडित कृष्ण कुमार शास्त्री, पंडित रमेश चंद्र गोनियल, पंडित राजेंद्र पोखरियाल, पंडित नीरज कोठारी, पंडित उमाशंकर पांडे आदि शामिल रहे।


