सादगी से मनाया गया साध्वी नेहा आनंद देव का अवतरण दिवस

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युवा संतों पर है सनातन को आगे बढ़ाने का दायित्व-श्रीमहंत डा.रविंद्रपुरी
सनातन के प्रचार प्रसार में अहम भूमिका निभा रही हैं साध्वी नेहा आनंद देव -स्वामी संतोषानंद देव

हरिद्वार, 16 सितम्बर। श्री अवधूत मंडल आश्रम के परमाध्यक्ष महामंडलेश्वर स्वामी संतोषानंद देव महाराज की परम शिष्या साध्वी नेहा आनंद देव का अवतरण दिवस सादगी से मनाया गया। इस अवसर पर सभी तेरह अखाड़ों के संत महापुरूष और श्रद्धालुओं की उपस्थिति में हनुमान चालीसा का पाठ किया गया और हनुमान जी को 56 भोग लगाया गया। देर शाम भजन संध्या का आयोजन किया गया।

संतों और श्रद्धालु भक्तों ने साध्वी नेहा आनंद देव को अवतरण दिवस की शुभकामनाएं दी और उनकी दीघार्यू की कामना की। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद एवं मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष श्रीमहंत डा.रविंद्रपुरी महाराज ने साध्वी नेहा आनंद को अवतरण दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सनातन को आगे बढ़ाने का दायित्व युवा संतों पर है। साध्वी नेहा आनंद देव जिस प्रकार सनातन के प्रचार प्रसार में अहम भूमिका निभा रही हैं।

वह अत्यंत सुखद है। महामंडलेश्वर स्वामी संतोषानंद देव महाराज ने कहा कि साध्वी नेहा आनंद देव द्वारा भक्तों को धर्म और अध्यात्म का ज्ञान प्रदान करने के साथ सनातन के संरक्षण संरक्षण संवर्द्धन के लिए किए जा प्रयासों से सभी को प्रेरणा लेनी चाहिए। आह्वान पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अरूण गिरी महाराज एवं महामंडलेश्वर स्वामी सत्यश्रेयानंद गिरी ने कहा कि देश की एकता अखंडता बनाए रखने में संत महापुरूषों की अहम भूमिका रही है। साध्वी नेहा आनंद देव अपने गुरू के दिखाए मार्ग पर चलते हुए धर्म संस्कृति के उत्थान और मानव कल्याण में योगदान कर रही हैं।

सभी संत महापुरूषों का आभार व्यक्त करते हुए साध्वी नेहा आनंद देव ने कहा कि पूज्य गुरूदेव से प्राप्त शिक्षाओं का अनुसरण करते हुए समाज में सनातन धर्म और अध्यात्म का प्रकाश फैलाना तथा मानव कल्याण करना ही उनके जीवन का उद्देश्य है। डीपी यादव ने भी साध्वी नेहा आनंद देव को अवतरण दिवस की शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि सरल स्वभाव की संत साध्वी नेहा आनंद देव अपने गुरू के कार्यो को आगे बढ़ा रही हैं।

इस अवसर पर महामंडलेश्वर स्वामी रामानुज सरस्वती, महंत सूरज दास, महंत सुतिक्ष्ण मुनि, स्वामी दिनेश दास, स्वामी रविदेव शास्त्री, स्वामी रघुवीर दास, महंत गोविंद दास, संत जगजीत सिंह, स्वामी हरिहरानंद सहित बड़ी संख्या में संत महंत मौजूद रहे।

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