अमित वालिया
परमार्थ को समर्पित होता है संतों का जीवन-स्वामी विश्वात्मानंद
अदभूत है स्वामी भास्करानंद के प्रति उनके भक्तों की श्रद्धा-श्रीमहंत रविंद्रपुरी
गुरू ही परमात्मा का दूसरा स्वरूप हैं-स्वामी भास्करानंद
हरिद्वार, 24 जून। महानिर्वाणी अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी विशोकानंद भारती महाराज ने कहा कि गुरू शिष्य परंपरा सनातन की अनूठी परंपरा है। जिसमें गुरू के सानिध्य में ज्ञान प्राप्त कर शिष्य समाज को मार्गदर्शन प्रदान करता है। भूपतवाला स्थित अखण्ड दयाधाम में आश्रम के परमाध्यक्ष महामंडलेश्वर स्वामी भास्करानंद महाराज के संयोजन में आयोजित संत सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए स्वामी विशोकानंद भारती महाराज ने कहा कि महामंडलेश्वर स्वामी भास्करानंद ने भक्तों के सहयोग से गुरूजनों की स्मृति में अखण्ड दयाधाम की स्थापना कर गुरू भक्ति को जो परिचय दिया है।
वह सभी के लिए प्रेरणादायी है। मुख्य अतिथी अटल अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी विश्वात्मानंद महाराज ने कहा कि परमार्थ के लिए जीवन समर्पित करने वाले संत महापुरूष भक्तों के सहयोग से जो भी निर्माण करते हैं। उसे समाज को ही समर्पित कर देते हैं। उन्होंने कहा कि महामंडलेश्वर स्वामी भास्करानंद महाराज द्वारा निर्मित भव्य अखण्ड दयाधाम सेवा और आश्रय का प्रमुख केंद्र बनेगा। महानिर्वाणी अखाड़े के सचिव श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज ने कहा कि महानिर्वाणी अखाड़े के ज्ञानी महामंडलेश्वरों की श्रंखला में शामिल महामंडलेश्वर स्वामी भास्करानंद के प्रति उनके भक्तों की श्रद्धा अद्भूत है
। उन्होंने कहा कि हरिद्वार में लाखों श्रद्धालु गंगा स्नान के लिए हरिद्वार आते हैं। इतनी बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं को आश्रय उपलब्ध कराने में आश्रमों, अखाड़ों की मुख्य भूमिका है। सनातन परंपरांओं को आगे बढ़ा रहे स्वामी भास्करानंद महाराज द्वारा स्थापित अखण्ड दयाधाम श्रद्धालुओं को आश्रय उपलब्ध कराने के साथ सनातन संस्कृति को आगे बढ़ाने में भी योगदान करेगा। महामंडलेश्वर स्वामी भास्करानंद महाराज ने सभी संत महापुरूषों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि गुरू ही परमात्मा का दूसरा स्वरूप हैं। पूज्य गुरूजनों से प्राप्त शिक्षाओं का अनुसरण करते हुए मानव सेवा करना ही उनका लक्ष्य है।
उन्होंने कहा कि अखण्ड दयाधाम की स्थापना में प्रमुख रूप से सहयोग करने वाले प्रेम गोयल, विजय गोयल, श्याम अग्रवाल साधुवाद के पात्र हैं। स्वामी भास्करानंद महाराज की शिष्या साध्वी कृष्णानंद, प्रेम गोयल, विजय गोयल व श्याम अग्रवाल ने फूलमाला पहनाकर और शॉल ओढ़ाकर सभी संत महापुरूषांेे का स्वागत किया। संत सम्मेलन के पूर्व भारत माता मंदिर से अखण्ड दयाधाम तक भव्य शोभायात्रा निकाली गयी। संत सम्मेलन का संचालन स्वामी आनन्द चैतन्य महाराज ने किया । महामंडलेश्वर स्वामी ललितानंद गिरी, स्वामी गिरधर गिरी, स्वामी अनंतानंद गिरी, महंत हनुमान बाबा, महंत राघवेंद्र दास, महंत दामोदर शरण दास, स्वामी कमलानंद गिरी, स्वामी शिव प्रेमानंद, स्वामी देवेंद्र स्वरूप, महंत गोविंददास, स्वामी रविदेव शास्त्री, स्वामी शिवम महंत, स्वामी कमलेश गिरी, महंत रूपेंद्र प्रकाश सहित बड़ी संख्या में संत महापुरूष और श्रद्धालु मौजूद रहे।


