‘‘स्वस्थ हृदय के लिए शरीर, मन और आत्मा का संतुलन आवश्यक’’
हरिद्वार। आज हम एक ऐसे युग में जी रहे हैं जहां प्रदूषण, अनहेल्दी खान-पान, फिजिकल एक्टिविटी की कमी और स्ट्रेसफुल लाइफस्टाइल ने सेहत को गंभीर खतरे में डाल दिया है। खासकर युवाओं में दिल की बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। हार्ट अटैक, स्ट्रोक और हार्ट फेलियर जैसी समस्याएं आज लाखों लोगों की जिंदगियां छीन रही हैं। हृदय को स्वस्थ रखने के लिए केवल दवा पर्याप्त नहीं, जीवनशैली में परिवर्तन के साथ ही शरीर, मन और आत्मा तीनों का संतुलन आवश्यक है।
विश्व हृदय दिवस पर उपरोक्त विचार रखते हुये स्वामी रामप्रकाश चैरिटेबल चिकित्सालय के मेडिकल डायरेक्टर और एसोसिएशन ऑफ फिजिशियंस ऑफ इंडिया, उत्तराखंड चैप्टर के पूर्व अध्यक्ष एवं आईएमए उत्तराखंड के वाईस प्रेसिडेंट इलेक्ट डा-संजय शाह ने कहा कि विश्व हृदय दिवस 2026 (29 सितंबर) की मुख्य थीम ‘‘एक भी धड़कन न चूकें’’ है। इस दिन को मनाने का मुख्य मकसद लोगों को दिल की बीमारियों के बारे में बताना और उन्हें स्वस्थ रहने के लिए प्रेरित करना है। हृदय-रोग केवल डॉक्टर या दवा से नहीं मिटता अपितु इसके लिये जीवनशैली मे सुधार अति आवश्यक है। इसके लिये हमें यह समझना होगा कि योग केवल व्यायाम नहीं, बल्कि यह शरीर-मन-आत्मा का विज्ञान है। अनुलोम-विलोम से रक्तचाप संतुलित होता है। कपालभाति से फेफड़े शुद्ध होते हैं और रक्त में ऑक्सीजन बढ़ती है। ध्यान करने से पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम सक्रिय होता है, जो हृदय को शांति और स्थिरता देता है। सुबह सूर्य उदय के साथ उठना, नंगे पैर हरी घास पर चलना, सूर्य की हल्की धूप लेना, समय पर भोजन और पर्याप्त नींद लेना।
डा-शाह ने बताया कि आजकल हम बहुत ज्यादा काम करते हैं, तनाव में रहते हैं, और सही तरह का खाना नहीं खाते हैं। इस वजह से बहुत सारे लोग दिल की बीमारियों से पीड़ित हो रहे हैं। दुनियाभर में हर साल लाखों लोग दिल की बीमारी की वजह से मर जाते हैं। कोरोनावायरस के बाद से तो ये समस्या और भी बढ़ गई है। पहले तो बड़े लोग ही दिल की बीमारी से ज्यादा परेशान होते थे, लेकिन अब तो छोटे-छोटे बच्चे भी इससे पीड़ित हो रहे हैं। आज के युग में जब जीवन की गति तीव्र है, काम का बोझ भारी है और भोजन- पानी तक कृत्रिम हो गए हैं, हृदय-स्वास्थ्य की रक्षा एक वैश्विक चुनौती बन चुकी है।
उन्होंने कहा कि मोटापा भी दिल की बीमारियों को खुला निमन्त्रण है। वजन घटाने के लिए नियमित व्यायाम तथा सीमित मात्र में साधारण भोजन सबसे अच्छा उपाय है। परन्तु वजन घटाने के लिए भूखे रहने तथा उल्टे-सीधे नुस्खों का चयन नहीं करना चाहिए इससे दिल पर बुरा असर पड़ता है। वहीं, धूम्रपान दिल और दिमाग को शराब से भी ज्यादा नुकसान पहुंचाता है। साथ ही एक व्यक्ति के धू्म्रपान करने से उसके आसपास के लोग भी अप्रत्यक्ष रूप से धुंए की चपेट में आ जाते हैं। धूल, धुआँ और प्रदूषण भी हृदय पर सीधा प्रभाव डालते हैं इसीलिए आधुनिक जीवनशैली को संतुलित करना आज सबसे बड़ी आवश्यकता है।
डा-संजय शाह ने बताया कि आधुनिक युग की सुविधा-संपन्नता ने हमें गति तो दी, परंतु स्वास्थ्य छीन लिया। पहले लोग ऽेतों में काम करते थे, पैदल चलते थे, भोजन ताजा और प्राकृतिक होता था। अब अधिकांश लोग घंटों कुर्सी पर बैठे रहते हैं, तनाव में जीते हैं, और प्रोसेस्ड ऽाद्य पदार्थों पर निर्भर हैं। तनाव आज का सबसे बड़ा हृदय-विनाशी कारक है। जब व्यक्ति लंबे समय तक मानसिक दबाव में रहता है, तो रक्तचाप बढ़ जाता है। पैकेट में बंद भोजन स्वाद में भले ही आकर्षक हो, परंतु यह अतिरिक्त नमक और शक्कर से भरपूर होता है। इससे मोटापा, उच्च रक्तचाप और डायबिटीज की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।
डा-शाह ने पांच सबसे आम हृदय समस्याएं की जानकारी देते हुये बताया कि कोरोनरी धमनी रोग दिल की सबसे आम बीमारी है। इसमें दिल को खून देने वाली धमनियों में वसा या प्लाक जम जाता है, जिससे खून का बहाव रुक जाता है और सीने में दर्द हो सकता है। उच्च रक्तचाप इसे हाई ब्लड प्रेशर भी कहते हैं। इसमें धमनियों पर खून का दबाव बहुत बढ़ जाता है, जिससे दिल को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है और दिल के दौरे का खतरा बढ़ता है। हृदय विफलता इसमें दिल की मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं। दिल शरीर की जरूरत के हिसाब से ठीक से खून पंप नहीं कर पाता है, जिससे सांस फूलने लगती है और शरीर में सूजन आ जाती है। अतालता यह दिल की धड़कन से जुड़ी समस्या है। इसमें दिल की धड़कन बहुत तेज, बहुत धीमी या अनियमित हो जाती है, जिससे चक्कर आना या बेहोशी हो सकती है। हृदय वाल्व रोग यह तब होता है जब दिल के वाल्व ठीक से खुलते या बंद नहीं होते हैं। इससे दिल के कक्षों में खून का प्रवाह बिगड़ जाता है।
डा-शाह ने बताया कि हृदय रोगों का मुख्य कारण है उच्च रक्तचाप, कोलेस्ट्रोल की अधिकता। कोलेस्ट्रोल के अणुओं का आकार भी दिल के रोगों की संभावना बढ़ाता है। रक्त नलिकाओं की भीतरी दीवारों पर बुरे कोलेस्ट्राल का जमना अथेरोस्टकलेरोसिस कहलाता है। इसके कारण रक्तत वाहिनियां संकरी हो जाती हैं और हृदय को रक्त की आपूर्ति कम हो जाती है। दिल को स्वस्थ रखने के लिए जरूरी है कि हम भोजन में वसा की मात्र को सीमित करें, तला-भुना और चिकनाई वाले खाने से वजन तो बढ़ता ही है साथ ही यह चिकनाई खून की धमनियों में जम जाती है जिससे खून का दौरा धीरे-धीरे कम होता जाता है।


