विडियो:-Smoking की लत छुड़ाने के लिए ऋषिकुल आयुर्वेदिक कालेज ने की पहल

Haridwar News
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तैयार की आयुर्वेदिक बीड़ी, चिकित्सकों को देखरेख में कराया जा रहा सेवन
हरिद्वार, 21 अगस्त। धूम्रपान स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। यह जानने के बाद भी पूरी दुनिया में करोड़ों लोग धूम्रपान करते हैं। बड़ी संख्या में लोग धूम्रपान की लत को छोड़ना भी चाहते हैं। लेकिन कमजोर इच्छाशक्ति और तलब के कारण इस बुरी तल को छोड़ नहीं पा रहे हैं। धूम्रपान की लत छोड़ने की कोशिश कर रहे लोगों की मदद के लिए ऋषिकुल आयुर्वेद कालेज के अगदतंत्र विभाग ने एक नई पहल की है।

इसके लिए उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों, आयुर्वेदाचार्यों और शोधार्थियों ने निकोटीन मुक्त औषधीय धूम्रपान दंडिका यानी हर्बल बीड़ी तैयार की है। चिकित्सकों के अनुसार इसका उद्देश्य धूम्रपान करने वाले व्यक्ति की मनोवैज्ञानिक तलब को कम करते हुए धीरे धीरे तंबाकू और निकोटीन से दूरी बनाने में मदद करना है। ऋषिकुल आयुर्वेद कालेज के अगदतंत्र विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डा.भावना मित्तल ने बताया कि धूम्रपान छोड़ना कई लोगों के लिए चुनौतीपूर्ण होता है।

इसी को ध्यान में रखते हुए आयुर्वेदिक औषधियों से हर्बल स्मोकिंग स्टिक तैयार की गई है। इसमें तंबाकू की जगह आयुर्वेदिक दवाएं भरी गई है। इसका इस्तेमाल चिकित्सकीय निगरानी में कराया जा रहा है और मरीजों की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। शोधार्थी डा.प्रगति नेगी ने बताया कि शमन धूम्रपान पर उनकी रिसर्च में उन्हें कॉलेज प्रशासन का पूरा सहयोग मिल रहा है। डा.प्रगति नेगी ने बताया कि प्राचीन आयुर्वेदाचार्यों ने शमन धूम्रपान और आयुर्वेद धूम्रपान के बारे में बताया है।

इस प्रयोग को वैज्ञानिक तरीके से आगे बढ़ाने के लिए इसे सेंट्रल क्लीनिकल ट्रायल रजिस्ट्री ऑफ इंडिया में रजिस्टर्ड कराया गया है। कालेज की ओपीडी में पिछले एक महीने से धूम्रपान छोड़ने के इच्छुक लोगों को चिकित्सकों की निगरानी में हर्बल स्मोक स्टिक यानी हर्बल बीड़ी का सेवन कराया जा रहा है।

ऋषिकुल आयुर्वेदिक कालेज के स्मोकिंग की लत छुड़ाने के उपाय की जानकारी मिलने पर प्रतिदिन कई लोग ओपीडी में पहुंचकर चिकित्सकों की देखरेख में आयुर्वेदिक विधि से इलाज करा रहे हैं। स्थानीय निवासी रामकुमार ने बताया कि वह 40 सालों से धूम्रपान की आदत से परेशान थे। हर्बल बीड़ी के इस्तेमाल के बाद उन्हें धूम्रपान की इच्छा में कमी महसूस हुई है।

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